aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "marham-e-dil"
तुम्हारी याद का मरहम बनाम-ए-दिल कर दूँतमाम हिज्र के ज़ख़्मों को मुंदमिल कर दूँ
कितना हसीं था जुर्म-ए-ग़म-ए-दिल कि दो-जहाँदर पे हैं आज तक मिरे रंग-ए-क़ुबूल के
खेल समझे हो ऐ दिल जिसेज़िंदगी है तमाशा नहीं
दिल-ए-मरहूमدِلِ مَرْحُوم
मृतक दिल, एक प्रेमी का दिल
नील-ओ-मरामنِیل و مَرام
Obtaining one's object, succes
Atish-e-Dil
साहिल माधोपुरी
वो ख़ुदा हो कि नाख़ुदा ऐ 'दिल'डूबना है तो सोचता क्या है
भूल बैठे हूँ वो कहीं ऐ दिलआज क्यूँ इतने याद आए हैं
फ़ा’इलातुन का नशा जिन पे चढ़ा है ऐ दिलवो मेरे फ़न की सताइश नहीं करने वाले
ऐ 'दिल' इन्हें इदराक कहाँ नम्रतियों काजो कहते हैं पल भर में बयाबाँ से गुज़र जा
हंगाम-ए-ख़ैर-मक़्दम-ए-सुब्ह-ए-नशात हैपरवाना-वार शाम से रक़्स-ए-शरर करो
इश्क़ तो ज़िंदा-ए-जावेद बना देता हैइश्क़ के बाब में मफ़्हूम-ए-फ़ना कुछ भी नहीं
उन्स क्यूँकर न हो ऐ दिल मुझे वीरानों सेहर ख़राबे में मिरा घर नज़र आता है मुझे
क्यों हवा हम को समझने लगी दुश्मन ऐ दिलहम दिए बेचते फिरते हैं सलाई तो नहीं
इस शहर में तो कुछ नहीं रुस्वाई के सिवाऐ 'दिल' ये इश्क़ ले के किधर आ गया तुझे
बन गई हुस्न-ए-तलब भी तो मुअ'म्मा ऐ 'दिल'दर्द माँगा था वो समझे कि दवा माँगी थी
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