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नज़्म
ख़िज़्र-ए-राह
मोम्याई की गदाई से तो बेहतर है शिकस्त
मोर-ए-बे-पर हाजते पेश-ए-सुलैमाने मबर
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मौत का गीत
मोर-ए-बे-जाँ से सुलैमान बहुत खेल चुका
वक़्त है आओ दो-आलम को दिगर-गूँ कर दें
मख़दूम मुहिउद्दीन
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रेख़्ता शब्दकोश
sar-e-maar kofta ba
सर-ए-मार कोफ़ता बा سَرِ مار کوفْتَہ بَہ
साँप का सर कुचल देना अच्छा है, ज़हरीले को नष्ट कर देना चाहिए
an ke dhan par chor raajaa
अन के धन पर चोर राजा اَن کے دَھن پر چور راجا
दूसरों का माल लेकर चोर धनी हो जाता है
mom kii maryam kaaTh ke paa.e, uTh rii maryam tire dhag.De aa.e
मोम की मरयम काठ के पाए, उठ री मरयम तिरे धगड़े आए مُوم کی مَرْیَم کاٹھ کے پائے، اُٹھ ری مَرْیَم تِرے دَھگڑے آئے
अपने में बूता नहीं दूसरों पर भरोसा करना और डींग हांकने वाले के संबंध में कहते हैं
chaar chor chauraasii baniye, ek ek kar ke luuTaa
चार चोर चौरासी बनिये, एक एक कर के लूटा چار چور چَوراسی بَنْیے، ایک ایک کَر کے لُوٹا
बनियों की कायरता पर व्यंग है
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नअत
गिरते पड़ते दर-ए-सरकार तक आ पहुँचा है
हम से पूछे कोई इक ताइर-ए-बे-पर के मज़े
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
नज़्म
शिकवा
क़ौम-ए-आवारा इनाँ-ताब है फिर सू-ए-हिजाज़
ले उड़ा बुलबुल-ए-बे-पर को मज़ाक़-ए-परवाज़
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
ताइर-ए-बे-पर बचे क्या दाम से सय्याद के
ज़द में जब सारी फ़ज़ा-ए-गुल्सिताँ तक आ गई
मुस्लिम मलेगाँवी
ग़ज़ल
पर किए हैं जो अता ताक़त-ए-परवाज़ भी दे
या तो मैं खुल के उड़ूँ या मुझे बे-पर कर दे
ज़फर इबन-ए-मतीन
ग़ज़ल
नावक-ए-बे-पर अगर है उस की मिज़गान-ए-दराज़
क़ौस क्यों समझे न आशिक़ अबरू-ए-ख़मदार को
मोहम्मद इब्राहीम आजिज़
कुल्लियात
क्या करें बेकस हैं हम बेबस हैं हम बे-घर हैं हम
क्यूँकर उड़ कर पहुँचें उस तक ताइर-ए-बे-पर हैं हम
