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ग़ज़ल
जिस ने दिल मेरा दिया दाम-ए-मोहब्बत में फँसा
वो नहीं मालूम मुज को नासेहा क्या चीज़ है
बहादुर शाह ज़फ़र
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ग़ज़ल
याँ तक सताना मुज को कि रो रो कहे तू हाए
यारो न तुम सुना कि फ़ुलाने ने क्या किया
मोहम्मद रफ़ी सौदा
ग़ज़ल
नैना अँझूँ सूँ धोऊँ पग अप पलक सूँ झाडूँ
जे कुई ख़बर सो लियावे मुख फूल का तुम्हारा
क़ुली क़ुतुब शाह
ग़ज़ल
सौत-ए-बुलबुल दिल-ए-नालाँ ने सुनाई मुज को
सैर-ए-गुल दीदा-ए-गिर्यां ने दिखाई मुज को






