आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "nargis-e-shahlaa-e-lucknow"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "nargis-e-shahlaa-e-lucknow"
नज़्म
शाइ'र का तराना
महरम-ए-शबनम रफ़ीक़-ए-लाला-ए-सहरा हूँ मैं
हम-नशीन-ए-यासमीन-ओ-नर्गिस-ए-शहला हूँ मैं
अफ़सर सीमाबी अहमद नगरी
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "nargis-e-shahlaa-e-lucknow"
अन्य परिणाम "nargis-e-shahlaa-e-lucknow"
ग़ज़ल
जिस गुल को ये सब ढूँडती फिरती हैं हवाएँ
तू ने तो उसे नर्गिस-ए-शहला नहीं देखा
आग़ा शाइर क़ज़लबाश
नज़्म
दीवाली
अध-जले ईंधन का आँखों में धुआँ भरता हुआ
नर्गिस-ए-शहला में सीमाब-ए-ख़िज़ाँ भरता हुआ
शाद आरफ़ी
नज़्म
बिंत-ए-माहताब
न क्यूँ भला मैं तुझे बिंत-ए-माहताब कहूँ
जो आँख नर्गिस-ए-शहला की आबरू ले ले
सरताज आलम आबिदी
ग़ज़ल
रही है सर नवा सन्मुख गई है भूल मंसूबा
तिरी अँखियों नीं शायद मात की है नर्गिस-ए-शहला
आबरू शाह मुबारक
ग़ज़ल
जो ख़ुश-चश्मों की उल्फ़त में दिया बर्बाद जी अपना
लगाओ उस की तुर्बत पर लजा कर नर्गिस-ए-शहला



