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नज़्म
ख़िज़्र-ए-राह
मैं शहीद-ए-जुस्तुजू था यूँ सुख़न-गुस्तर हुआ
ऐ तिरी चश्म-ए-जहाँ-बीं पर वो तूफ़ाँ आश्कार
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
राशिदा-बाजी और एक लड़की
राशिदा-बाजी ने चुप से मुँह पर मिरे
एक थप्पड़ जो मारा तो मैं हँस पड़ी
राजा मेहदी अली ख़ाँ
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नज़्म
ख़्वातीन का बैंक
चटख़ारे हैं ज़बाँ पे नज़र में इशारे हैं
हर माह-वश के पर्स में इमली कटारे हैं
खालिद इरफ़ान
ग़ज़ल
शाम हुए ख़ुश-बाश यहाँ के मेरे पास आ जाते हैं
मेरे बुझने का नज़्ज़ारा करने आ जाते होंगे
जौन एलिया
नज़्म
हमेशा देर कर देता हूँ
मदद करनी हो उस की यार की ढारस बंधाना हो
बहुत देरीना रस्तों पर किसी से मिलने जाना हो
मुनीर नियाज़ी
नज़्म
रम्ज़
इन किताबों ने बड़ा ज़ुल्म किया है मुझ पर
इन में इक रम्ज़ है जिस रम्ज़ का मारा हुआ ज़ेहन




