आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "phone"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "phone"
ग़ज़ल
मैं उस को हर रोज़ बस यही एक झूट सुनने को फ़ोन करता
सुनो यहाँ कोई मसअला है तुम्हारी आवाज़ कट रही है
तहज़ीब हाफ़ी
नज़्म
दरख़्त-ए-ज़र्द
उसे तुम फ़ोन करते और ख़त लिखते रहे होगे
न जाने तुम ने कितनी कम ग़लत उर्दू लिखी होगी
जौन एलिया
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "phone"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "phone"
शेर
ये किस ने फ़ोन पे दी साल-ए-नौ की तहनियत मुझ को
तमन्ना रक़्स करती है तख़य्युल गुनगुनाता है
अली सरदार जाफ़री
नज़्म
विर्सा
मेरी ताईद से ढाले गए मैं मुजरिम हूँ
पटरियाँ रेल की सड़कों की बसें फ़ोन के तार
साहिर लुधियानवी
नज़्म
लास्ट कॉल
कल हमेशा की तरह उस ने कहा ये फ़ोन पर
मैं बहुत मसरूफ़ हूँ मुझ को बहुत से काम हैं
वसी शाह
नज़्म
ख़ुद-कलामी
क्या ज़रूरी है कि हम फ़ोन पे बातें भी करें
क्या ज़रूरी है कि हर लफ़्ज़ महकने भी लगे
मुनव्वर राना
नज़्म
माँ तिरे जाने के बा'द
फ़ोन पर किस को सुनाऊँगी मैं अपना हाल-ए-ज़ार
किस की बातें सुन के आएगा मिरे दिल को क़रार
शहनाज़ परवीन शाज़ी
नज़्म
वो बिछड़ा है तो याद आया
मोहब्बत वो नहीं है जो ये नस्ल-ए-नौ समझती है
ये पहरों फ़ोन पर बातें
मीसम अली आग़ा
ग़ज़ल
अगर हूँ ग़ुस्से में फिर भी मैं चाहता ये हूँ
मैं सिर्फ़ हिज्र कहूँ और फ़ोन कट जाए

