aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "portrait"
किसे ज़िंदगी है अज़ीज़ अब किसे आरज़ू-ए-शब-ए-तरबमगर ऐ निगार-ए-वफ़ा तलब तिरा ए'तिबार कोई तो हो
है जो पुर-ख़ूँ तुम्हारा अक्स-ए-ख़यालज़ख़्म आए कहाँ कहाँ जानाँ
जिस तरह बादल का साया प्यास भड़काता रहेमैं ने ये आलम भी देखा है तिरी तस्वीर का
लेकिन आज, दोस्तोएफ़्सकी की हैसियत रूसी अदब के शायद सबसे बड़े सरमाया-ए-इफ़्तिख़ार की है और ख़ुद तरक़्क़ी-पसंद तन्क़ीद ने मंटो से हार मान ली है। कुछ अ’र्सा पहले तक अमरीका के बा’ज़ कुतुब-ख़ानों में ज्वाइस किताब A Portrait of the Artist as a young Man उस कमरे में मुक़फ़्फ़ल कर...
जो दीवार पर लगे पोर्ट्रेट कोधुँदला कर रही है
एक बहुत अजीब और गहरी शाम मेंमैं ने
SELF PORTRAIT AT THE DRESSING TABLE....
مصوری کے حوالے سے یہ کہنا غلط نہ ہوگا کہ فکشن کے یہ قدیم کردار پورٹریٹ Portrait سے مشابہ ہیں جو خدوخال کے گاڑھے پن کا ایک نمونہ ہوتی ہے۔ ساختیاتی تنقید کے مطابق یہ قدیم کردار ایک طرح کی خودکار اکائیاں (Autonomous Wholes) ہیں جو اپنے مخصوص جسمانی اورنفسیاتی...
कृष्ण का काव्यात्मक रूप समय-समय पर कई कवियों को देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ | इनमें सूरदास, मीराबाई और विद्यापति अहम् नामों में हैं | शायरी की इस परम्परा को उर्दू शायरों ने भी बख़ूबी निभाया है | मिसाल के तौर पर यहाँ चुनिन्दा उर्दू नज़्में दी जा रही हैं |
उर्दू शायरी में बसंत कहीं-कहीं मुख्य पात्र के तौर पर सामने आता है । शायरों ने बहार को उसके सौन्दर्यशास्त्र के साथ विभिन्न और विविध तरीक़ों से शायरी में पेश किया है ।उर्दू शायरी ने बसंत केंद्रित शायरी में सूफ़ीवाद से भी गहरा संवाद किया है ।इसलिए उर्दू शायरी में बहार को महबूब के हुस्न का रूपक भी कहा गया है । क्लासिकी शायरी के आशिक़ की नज़र से ये मौसम ऐसा है कि पतझड़ के बाद बसंत भी आ कर गुज़र गया लेकिन उसके विरह की अवधि पूरी नहीं हुई । इसी तरह जीवन के विरोधाभास और क्रांतिकारी शायरी में बसंत का एक दूसरा ही रूप नज़र आता है । यहाँ प्रस्तुत शायरी में आप बहार के इन्हीं रंगों को महसूस करेंगे ।
उर्दू शायरी में बसंत कहीं-कहीं मुख्य पात्र के तौर पर सामने आता है । शायरों ने बसंत को उसके सौन्दर्यशास्त्र के साथ विभिन्न और विविध तरीक़ों से शायरी में पेश किया है ।उर्दू शायरी ने बसंत केंद्रित शायरी में सूफ़ीवाद से भी गहरा संवाद किया है ।इसलिए उर्दू शायरी में बहार को महबूब के हुस्न का रूपक भी कहा गया है । क्लासिकी शायरी के आशिक़ की नज़र से ये मौसम ऐसा है कि पतझड़ के बाद बसंत भी आ कर गुज़र गया लेकिन उसके विरह की अवधि पूरी नहीं हुई । इसी तरह जीवन के विरोधाभास और क्रांतिकारी शायरी में बसंत का एक दूसरा ही रूप नज़र आता है । यहाँ प्रस्तुत शायरी में आप बहार के इन्हीं रंगों को महसूस करेंगे ।
portrait portrait
नक़्शा
self-portrait self-portrait
अपने हाथ से बनाई हुई अपनी तस्वीर या क़लमी ख़ाका।
Portrait
रहीम गुल
स्केच / ख़ाका
Dard Ka Portrait
मज़हरुज़्ज़माँ ख़ाँ
नाटक / ड्रामा
इक़बाल हसन आज़ाद
अफ़साना
ہے۔ وہ اکتا کر ٹی وی آف کر دیتا اور کتابوں سے دل بہلانے لگتا۔ ایک دن کتابوں کی الماری سے ایک ناول نکل آیا۔ Portrait of a lady۔ یہ ناول وہ کئی بار پڑھ چکا تھا مگر آج اس کے عنوان کو دیکھ کر ایک بھولی بسری یاد اس...
’’آج وہ اس پہاڑ کی سب سے اونچی چوٹی پرجاکر تصویر بنائےگا۔ وہ برسوںسے بھٹک رہا ہے۔ کبھی نالندہ کے کھنڈروں میں اور کبھی بودھوں کے پرانے مندر کے اردگرد۔ اس نے راجگیر کے برھما کنڈ میں اشنان کرتی دوشیزائوں کی تصویریں بنائی ہیں تو کبھی کشمیر کی پہاڑیوں سے...
देखा है किसी ने उसे कहींआधे सर में उलझे उलझे उजले बाल
हीमेरस के पोर्ट्रेट को लम्स आलूद करती रहीं
عمارت کے سامنے لان تھا، جس کے حاشیہ پر پختہ راستہ بنا ہوا تھا۔ ہم اس راستے سے گزرتے ہوئے عمارت کے برآمدے میں پہنچ گئے۔ برآمدے کو عبور کیااور پھر ایک نہایت آراستہ، پیراستہ دالان میں داخل ہوگئے۔ دالان کی دیواروں پر، راجوں مہاراجوں سے مشابہ دیوار گیر، پورٹریٹ...
भूका मन कि तनएक मुअ'म्मा
न चाहते हुए तुम्हें कुछ नज़्में पढ़नी चाहिएँउन नज़्मों की ख़्वाहिशात के बर-'अक्स तुम्हें बनाना चाहिए अपना पोर्ट्रेट
سرایفورایوانس (Sir Ifor Evans) نے اپنے طور پر ناول کی نسبتاً زیادہ واضح اور تفصیلی تعریف کی ہے: "Thus the novel can be described as a narrative in prose, based on a story, in which the author may portray character, and the life of an age, and analyse sentiments and...
आहिस्ता-आहिस्ता नक़्क़ादों और मुसव्विरी-पसंदों को महसूस हुआ कि उनमें भी एक तरह की ख़ूबसूरती है और शायद ये ख़ूबसूरती भी उसी तरह की है जैसी तिशिया (Tiziano Titian) की Portraits जारजिओन (Giorgio Giorgione) के Landscapes में थी।...
نرائن: واہ بھائی واہ۔۔۔I say it is poetry-it is Literature۔۔۔ اُس کے سفیدٹخنوں میں بندھے ہوئے گھنگھروؤں کی جھنجھناہٹ ابھی تک گونج رہی تھی۔ کشور: اُس کے کانوں میں ان گھنگھروؤں کی آواز تک گونج رہی تھی۔...
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books