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तंज़-ओ-मज़ाह
मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी
नज़्म
बसंत और होली की बहार
पत्ते जो ज़र्द ज़र्द हैं सोने के पात हैं
सदबर्ग से तलाई किरन फूल मात हैं
उफ़ुक़ लखनवी
ग़ज़ल
मुँह चाँद उस पे ज़ुल्फ़-ए-रसा सर से पाँव तक
क्यूँ लोट-पोट हो न अदा सर से पाँव तक
शाद अज़ीमाबादी
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रेख़्ता शब्दकोश
po.n
पोंپوں
उक्त बाजे से निकलनेवाला पों शब्द। मुहा०-(किसी की) पों बजाना = किसी की बात का समर्थन बिना समझे-बूझे करना। (व्यंग्य और परिहास) २. अधोवायु। पाद। मुहा०-पों बोलना = (क) हार मानना। (ख) थककर बैठ रहना। (ग) दिवाला निकालना। दिवालिया बनना।
pau rahnaa
पौ रहनाپَو رَہْنا
(पच्चीसी, चौसर) नर्द का आख़िरी ख़ाने में जा पड़ना
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ग़ज़ल
मुँह चाँद उस पे ज़ुल्फ़-ए-रसा सर से पाँव तक
क्यूँ लोट-पोट हो न अदा सर से पाँव तक
शाद अज़ीमाबादी
नज़्म
घास में छुपे साँप
करोड़ों इंसानों को तस्कीन देते हैं
बच्चे घास पर भागते दौड़ते उछलते कूदते और लोट-पोट होते हैं
मोहम्मद हनीफ़ रामे
ग़ज़ल
लट-पटे सज नीं तिरे दिल कूँ किया है लोट-पोट
वर्ना आलम बीच टुक बंदों का कुछ तोड़ा नहीं






