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ग़ज़ल
वो क्या दिन थे जो क़ातिल-बिन दिल-ए-रंजूर रो देता
मिरा हर ज़ख़्म जूँ वो तेग़ होती दूर, रो देता
वली उज़लत
कुल्लियात
मुग़ाँ मुझ मस्त बिन फिर ख़ंदा-ए-साग़र न होवेगा
मय-ए-गुलगूँ का शीशा हिचकियाँ ले ले के रोवेगा
मीर तक़ी मीर
ग़ज़ल
क़ातिल से गर न मिलिए तो 'जुरअत' हमारी क्या
जूँ गुल शगुफ़्ता हो न कोई ज़ख़्म खाए बिन
जुरअत क़लंदर बख़्श
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विषय
क़ातिल
क़ातिल शायरी
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रेख़्ता शब्दकोश
ban-kaTii
बनकटी بَن کَٹی
जंगलों से लकड़ी काट कर लाने का शुल्क
diin-e-KHaliil
दीन-ए-ख़लील دِینِ خَلِیل
the Hanifi sect in Islam
qaatil-bil-KHataa
क़ातिल-बिल-ख़ता قاتِل بِالْخَطا
ऐसा व्यक्ति जिसने जानबूझ कर हत्या न की हो बल्कि ग़लती या भूल-चूक के कारण उससे हत्या हो गई हो
min-qabiil
मिन-क़बील مِن قَبِیل
زُمرے میں سے ، نوعیت کے اعتبار سے ۔
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नज़्म
दिल-ए-पुर-ख़ूँ
दिल बहुत दुखता है हर बात पे दिल दुखता है
सुब्ह-ए-नौ-ख़ेज़ पे सूरज की जहाँबानी पे
इकराम ख़ावर
ग़ज़ल
तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं
एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
क़तील शिफ़ाई
ग़ज़ल
कैसे कैसे भेद छुपे हैं प्यार भरे इक़रार के पीछे
कोई पत्थर तान रहा है शीशे की दीवार के पीछे
क़तील शिफ़ाई
ग़ज़ल
हसीन और उस पे ख़ुद-बीं वो सितम-गर यूँ भी है यूँ भी
नज़ारा क़ब्ज़ा-ए-क़ुदरत से बाहर यूँ भी है यूँ भी
क़ैसर हैदरी देहलवी
ग़ज़ल
दिन हँस के न जो गुज़रे वो रो के गुज़ारे हैं
जैसे भी हुआ सर से कुछ बोझ उतारे हैं

