आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "rasm-e-muravvat"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "rasm-e-muravvat"
ग़ज़ल
क्या सख़्ती-ए-तालेअ' है करूँ किस से शिकायत
कुछ तुम को रह-ओ-रस्म-ए-मुरव्वत नहीं आती
मीर शम्सुद्दीन फ़ैज़
ग़ज़ल
दिखा दिखा के मआल-ए-जुनूँ की फ़ित्नागरी
बशर को रस्म-ए-मुरव्वत सिखाई जाती है
लक्ष्मी नारायण फ़ारिग़
अन्य परिणाम "rasm-e-muravvat"
ग़ज़ल
फिर किसी ज़ख़्म के खुल जाएँ न टाँके देखो
रहने दो तज़्किरा-ए-रस्म-ए-वफ़ा रहने दो
सय्यदा शान-ए-मेराज
ग़ज़ल
बस इसी बात पे वो शख़्स ख़फ़ा है मुझ से
शहर में तज़्किरा-ए-रस्म-ए-वफ़ा है मुझ से
सय्यदा शान-ए-मेराज
ग़ज़ल
ज़िंदा हो रस्म-ए-जुनूँ किस की नवा-रेज़ी से
अब रहा कौन यहाँ शो'ला-ब-जाँ हम-नफ़सो
बद्र-ए-आलम ख़लिश
ग़ज़ल
हम और रस्म-ए-बंदगी आशुफ़्तगी उफ़्तादगी
एहसान है क्या क्या तिरा ऐ हुस्न-ए-बे-परवा तिरा
इब्न-ए-इंशा
ग़ज़ल
आले रज़ा रज़ा
ग़ज़ल
तकल्लुफ़-बर-तरफ़ रस्म-ए-मुरव्वत तह करो 'रिज़वी'
मोहब्बत आप होती है मोहब्बत की नहीं जाती
इज्तिबा रिज़वी
शेर
हुस्न काफ़िर था अदा क़ातिल थी बातें सेहर थीं
और तो सब कुछ था लेकिन रस्म-ए-दिलदारी न थी
आल-ए-अहमद सुरूर
ग़ज़ल
हुस्न काफ़िर था अदा क़ातिल थी बातें सेहर थीं
और तो सब कुछ था लेकिन रस्म-ए-दिलदारी न थी