आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "ruKH-e-sardaar-e-ambiyaa"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "ruKH-e-sardaar-e-ambiyaa"
ग़ज़ल
आले रज़ा रज़ा
अन्य परिणाम "ruKH-e-sardaar-e-ambiyaa"
ग़ज़ल
होशियारी से हो 'परवीं' चमन-ए-हुस्न की सैर
दाम और दाना हैं दोनों रुख़-ए-दिलदार के पास
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
वो हक़ सच की इबारत पढ़ने से महरूम रहते हैं
कि जिन को रौशनी की लौ रुख़-ए-बातिल से मिलती है
सरदार पंछी
ग़ज़ल
चली जाएगी इक ही रुख़ हवा ताकि ज़माने की
न पूरा होगा तेरा दौर ये ऐ आसमाँ कब तक
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
करता हूँ जो बार बार बोसा-ए-रुख़ का सवाल
हुस्न के सदक़े से है मुझ को गदाई का इश्क़
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
हर्फ़-ए-'सरदार' में पोशीदा हैं असरार-ए-हयात
शेर-ए-'सरदार' में है सरकशी-ओ-सरशारी
अली सरदार जाफ़री
ग़ज़ल
जल्वा बख़्शा वो मुझे तेरे रुख़-ए-पुर-नूर ने
तूर पर मूसा गया था जिस के पाने के लिए
सरदार गंडा सिंह मशरिक़ी
ग़ज़ल
ज़ख़्म-ए-फ़ुर्क़त को तिरी याद ने भरने न दिया
ग़म-ए-तंहाई मगर रुख़ पे उभरने न दिया


