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ग़ज़ल
सैर-ए-बहार-ए-हुस्न ही अँखियों का काम जान
दिल कूँ शराब-ए-शौक़ का साग़र मुदाम जान
आबरू शाह मुबारक
शेर
बहार-ए-हुस्न ये दो दिन की चाँदनी है हुज़ूर
जो बात अब की बरस है वो पार साल नहीं
लाला माधव राम जौहर
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ग़ज़ल
तुझ में कब हुस्न-ए-बहार-ए-गुल की रानाई न थी
कब तिरे जल्वों की इक दुनिया तमाशाई न थी
जौहर ज़ाहिरी
ग़ज़ल
तुझ में कब हुस्न-ए-बहार-ए-गुल की रा'नाई न थी
कब तिरे जल्वों की इक दुनिया तमाशाई न थी
जौहर ज़ाहिरी
नज़्म
गंगा अश्नान
ऐ बहार-ए-गंग ऐ सरमाया-ए-पाकीज़गी
तेरी हस्ती तिश्ना-कामों के लिए मय-ख़ाना है
साक़िब कानपुरी
ग़ज़ल
जान-ए-बहार-ए-ज़िंदगी आँखें ज़रा मिलाए जा
गुलशन-ए-क़ल्ब पर मिरे बर्क़-ए-नज़र गिराए जा
नाज़िश सिकन्दरपुरी
ग़ज़ल
दिखला रहे हो लुत्फ़-ए-बहार-ओ-ख़िज़ाँ तुम्हीं
गुल हो तुम्हीं चमन हो तुम्हीं बाग़बाँ तुम्हीं


