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ग़ज़ल
अगर होता वो 'मजज़ूब'-ए-फ़रंगी इस ज़माने में
तो 'इक़बाल' उस को समझाता मक़ाम-ए-किबरिया क्या है
अल्लामा इक़बाल
शेर
ओ दिल तोड़ के जाने वाले दिल की बात बताता जा
अब मैं दिल को क्या समझाऊँ मुझ को भी समझाता जा
हफ़ीज़ जालंधरी
ग़ज़ल
हाए-री मजबूरियाँ तर्क-ए-मोहब्बत के लिए
मुझ को समझाते हैं वो और उन को समझाता हूँ मैं
जिगर मुरादाबादी
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रेख़्ता शब्दकोश
samjhaanaa
समझाना سَمْجھانا
कोई बात अच्छी तरह किसी के मन में बैठाना, शब्द, संकेत आदि के अर्थ से किसी को भलीभाँति परिचित कराना, ज्ञान प्राप्त कराना, ध्यान में जमाना, बोध कराना
kyaa samjhaa thaa
क्या समझा था کیا سَمْجھا تھا
शायद कुछ और समझा था, जैसा तजुर्बे और मुशाहिदे में आया वैसा नहीं समझा था
dil samjhaanaa
दिल समझाना دِل سَمْجھانا
परेशान दिल को तसल्ली देना, बेक़रार दिल को तसकीन देना
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नज़्म
क्लर्क का नग़्मा-ए-मोहब्बत
जूँ तूँ रस्ता कट जाता है और बंदी-ख़ाना आता है
चल काम में अपने दिल को लगा यूँ कोई मुझे समझाता है
मीराजी
ग़ज़ल
'हश्र' मेरी शे'र-गोई है फ़क़त फ़रियाद-ए-शौक़
अपना ग़म दिल की ज़बाँ में दिल को समझाता हूँ मैं
आग़ा हश्र काश्मीरी
ग़ज़ल
ओ दिल तोड़ के जाने वाले दिल की बात बताता जा
अब मैं दिल को क्या समझाऊँ मुझ को भी समझाता जा