आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "samjhuu.n"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "samjhuu.n"
ग़ज़ल
ग़म के अँधियारे में तुझ को अपना साथी क्यूँ समझूँ
तू फिर तू है मेरा तो साया भी मेरे साथ नहीं
क़तील शिफ़ाई
ग़ज़ल
तुम्हारे अहद-ए-वफ़ा को मैं अहद क्या समझूँ
मुझे ख़ुद अपनी मोहब्बत पे ए'तिबार नहीं
साहिर लुधियानवी
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "samjhuu.n"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
रेख़्ता शब्दकोश
mai.n na samjhuu.n to bhalaa kyaa ko.ii samjhaa.e mujhe
मैं न समझूँ तो भला क्या कोई समझाए मुझे مَیں نَہ سَمْجُھوں تو بَھلا کیا کوئی سَمْجھائے مُجھے
ज़िद्दी आदमी के मुताल्लिक़ कहते हैं, आदमी ख़ुद ना समझना चाहे तो कोई नहीं समझा सकता
अन्य परिणाम "samjhuu.n"
ग़ज़ल
है ये क़िस्सा कितना अच्छा पर मैं अच्छा समझूँ तो
एक था कोई जिस ने यक-दम ये दुनिया पैदा की थी
जौन एलिया
ग़ज़ल
गो न समझूँ उस की बातें गो न पाऊँ उस का भेद
पर ये क्या कम है कि मुझ से वो परी-पैकर खुला
मिर्ज़ा ग़ालिब
नज़्म
आज की बातें कल के सपने
हम-सफ़र तुझ को कहूँ या तुझे रहज़न समझूँ
राह में ला के मुझे छोड़ दिया है तू ने
क़तील शिफ़ाई
ग़ज़ल
किसे आबाद समझूँ किस का शहर-आशोब लिक्खूँ मैं
जहाँ शहरों की यकसाँ सूरत-ए-हालात होती है
ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
ग़ज़ल
मुझ से इरशाद ये होता है कि समझूँ उन को
और फिर भीड़ में दुनिया की वो खो जाते हैं

