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ग़ज़ल
जुदाई में ये शर्त-ए-ज़ब्त-ए-ग़म तो मार डालेगी
हम उन के सामने कुछ देर रो लेते तो अच्छा था
रईस अमरोहवी
ग़ज़ल
मुझे जब शान-ए-ज़ब्त-ए-ग़म दिखाने का ख़याल आया
वुफ़ूर-ए-दर्द में भी मुस्कुराने का ख़याल आया
ग़ुलाम मुस्तफा बेग साबिर बरारी
ग़ज़ल
सोज़-ए-दिल बढ़ने न पाए आँख तक ऐ ज़ब्त-ए-ग़म
आग भड़का देगा ये इस ख़ाना-ए-ख़स-पोश में
ऐमन अमृतसरी
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ग़ज़ल
ज़ब्त-ए-ग़म से लाख अपनी जान पर बन आए है
हाँ मगर ये इज़्ज़त-ए-सादात तो रह जाए है
सय्यदा शान-ए-मेराज
ग़ज़ल
ज़ब्त-ए-ग़म मुश्किल है और मुश्किल है मुश्किल का जवाब
नासेह-ए-मुशफ़िक़ तिरे बस का नहीं दिल का जवाब

