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ग़ज़ल
ख़ुदा-नुमा है बुत-ए-संग-ए-आस्ताना-ए-इश्क़
चलूँगा पा-ए-निगह बन के सू-ए-ख़ाना-ए-इश्क़
ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर
ग़ज़ल
नाज़-ए-बुत-ए-महवश पर क़ुर्बान दिल-ओ-जाँ है
ये शान-ए-ख़ुदा शाहिद-ए-ग़ारत-गर-ए-ईमाँ है
अली मंज़ूर हैदराबादी
ग़ज़ल
तू अगर मुझ से जुदा ऐ बुत-ए-नादाँ होगा
मिस्ल-ए-नाक़ूस ये दिल हिज्र में नालाँ होगा
अब्दुल मजीद ख़्वाजा शैदा
ग़ज़ल
शुमार-ए-सुब्हा मर्ग़ूब-ए-बुत-ए-मुश्किल-पसंद आया
तमाशा-ए-ब-यक-कफ़ बुर्दन-ए-सद-दिल-पसंद आया
मिर्ज़ा ग़ालिब
शेर
जान जानी है मिरी ऐ बुत-ए-कम-सिन तुझ पर
मर ही जाऊँगा गला काट के इक दिन तुझ पर
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
ग़ज़ल
कौन से दिन तिरी याद ऐ बुत-ए-सफ़्फ़ाक नहीं
कौन सी शब है कि ख़ंजर से जिगर चाक नहीं

