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हिंदी ग़ज़ल
सारी दुनिया में लुटाता ही रहा प्यार अपना
कौन है, सुनते हैं, 'बेचैन-कुँवर' है कोई
कुंवर बेचैन
हास्य
बह रही है रात-भर से नाक सर में दर्द है
और कुछ सुनते नहीं हैं कान बाक़ी ख़ैर है
सय्यद फ़हीमुद्दीन
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शेर
मैं ने कहा था उस से अहवाल-ए-गिरिया अपना
सुनते ही हँस पड़ा वो यकबार खिलखिला कर
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
ग़ज़ल
ज़माना वारदात-ए-क़ल्ब सुनने को तरसता है
इसी से तो सर आँखों पर मिरा दीवान लेते हैं
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
मैं पल दो पल का शा'इर हूँ
कल और आएँगे नग़्मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले
मुझ से बेहतर कहने वाले तुम से बेहतर सुनने वाले
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
मैं उस को हर रोज़ बस यही एक झूट सुनने को फ़ोन करता
सुनो यहाँ कोई मसअला है तुम्हारी आवाज़ कट रही है
तहज़ीब हाफ़ी
नज़्म
दरख़्त-ए-ज़र्द
गुमाँ ये है कि बाक़ी है बक़ा हर आन फ़ानी है
कहानी सुनने वाले जो भी हैं वो ख़ुद कहानी हैं
जौन एलिया
नज़्म
परिंदे की फ़रियाद
गाना इसे समझ कर ख़ुश हों न सुनने वाले
दुखते हुए दिलों की फ़रियाद ये सदा है
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
भरी है दिल में जो हसरत कहूँ तो किस से कहूँ
सुने है कौन मुसीबत कहूँ तो किस से कहूँ
बहादुर शाह ज़फ़र
नज़्म
ये बातें झूटी बातें हैं
वो इल्म में अफ़लातून सुने वो शेर में तुलसीदास हुए
वो तीस बरस के होते हैं वो बी-ए एम-ए पास हुए


