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ग़ज़ल
लिखता हूँ उस परी की सिफ़त चश्म-ए-शोख़ की
तार-ए-निगाह-ए-हूर हो मिस्तर के वास्ते
मुंशी देबी प्रसाद सहर बदायुनी
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ग़ज़ल
क़र्ज़-ए-निगाह-ए-यार अदा कर चुके हैं हम
सब कुछ निसार-ए-राह-ए-वफ़ा कर चुके हैं हम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
कर रहा है सामना तीर-ए-निगाह-ए-नाज़ का
अल्लह अल्लह ये कलेजा आशिक़-ए-जाँबाज़ का
फ़ज़ल हुसैन साबिर
ग़ज़ल
तबीब आरवी
ग़ज़ल
वो कौन है जो हलाक-ए-निगाह-ए-नाज़ नहीं
मैं कुछ नहीं हूँ अगर चश्म-ए-इम्तियाज़ नहीं

