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ग़ज़ल
कभी साहिल पे रह कर शौक़ तूफ़ानों से टकराएँ
कभी तूफ़ाँ में रह कर फ़िक्र है साहिल नहीं मिलता
असरार-उल-हक़ मजाज़
ग़ज़ल
समंद-ए-नाज़ की टापों से सर टकराएँ सब आशिक़
पिला शर्बत शहादत का किसी दिन कासा-ए-सम से
असद अली ख़ान क़लक़
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रेख़्ता शब्दकोश
kau.Dii aa.e to gulgule pakaa.e.n
कौड़ी आए तो गुलगुले पकाएँ کَوڑی آئے تو گُلگُلے پَکائیں
थोड़ा बहुत रुपया पैसा, कुछ पाउं तो रंगरलियां मनाएं, रुपय पैसे की आमद पर ऐश की सूझती है
qaazii jii bahut haraa.e.n mai.n haartaa hii nahii.n
क़ाज़ी जी बहुत हराएँ मैं हारता ही नहीं قاضی جی بَہُت ہَرائیں مَیں ہارْتا ہی نَہِیں
कोई व्यक्ति समझाने के अतिरिक्त न समझे और जो कुछ उसके दिमाग़ में जम जाये उसी पर सदृढ़ रहे
raam bharose jo rahe.n parbat par lahraa.e.n, tulsii barvaa baaG ke siichat hii kumlaa.e.n
राम भरोसे जो रहें पर्बत पर लहराएँ, तुलसी बरवा बाग़ के सीचत ही कुम्लाएँ رام بَھروسے جو رَہیں پَربَت پَر لَہْرائیں، تُلْسی بَروا باغ کے سِیچَت ہی کُمْلائیں
जो ख़ुदा पर भरोसा रखते हैं वो हर जगह सरसब्ज़ रहते हैं बाग़ के पौदे बावजूद सींचने के सूख जाते हैं
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शेर
आज कम-अज़-कम ख़्वाबों ही में मिल के पी लेते हैं, कल
शायद ख़्वाबों में भी ख़ाली पैमाने टकराएँ लोग
अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा
नज़्म
नतशे ने कहा
मगर मुक़द्दर ये था कि ऐ दोस्त
बे-करानी से जा के टकराएँ और हम पाश पाश हो जाएँ


