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ग़ज़ल
वो जो हैं लज़्ज़त-ए-तफ़्हीम-ए-सुख़न से वाक़िफ़
शे'र सुनते हैं वही लोग मुकर्रर मुझ से
अब्दुल वहाब सुख़न
ग़ज़ल
मिरी सरिश्त-ए-'सुख़न' में हैं कुछ नए उस्लूब
नई ग़ज़ल ने मुझे भी ख़ुश-आमदीद कहा
अब्दुल वहाब सुख़न
ग़ज़ल
उफ़ुक़ का चेहरा 'सुख़न' इस कदर उदास है क्यूँ
शफ़क़ के रंग में ये सुर्ख़ी-ए-लहू कैसी
अब्दुल वहाब सुख़न
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tahsiin-e-suKHan-fahm
तहसीन-ए-सुख़न-फ़हम تَحْسِینِ سُخَن فَہْم
علم ادب و شعر کو سمجھنے اور پرکھنے والے کا کسی کلام کی تعریف کرنے کا عمل ؛ ماہر ادب کی کسی ادب بارے کی ستائش .
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ग़ज़ल
किसी के नक़्श-ए-क़दम की थी जुस्तुजू वर्ना
मैं इस तरह तो 'सुख़न' दर-ब-दर नहीं होता
अब्दुल वहाब सुख़न
ग़ज़ल
हुसूल-ए-अम्न-ओ-मुहब्बत की चाशनी के लिए
मिज़ाज-ए-तल्ख़ी-ए-दौराँ 'सुख़न' गवारा कर
अब्दुल वहाब सुख़न
ग़ज़ल
अभी है दूर हर इक महफ़िल-ए-तरब से 'सुख़न'
दिल-ओ-नज़र में अभी इज़्तिराब इतने हैं
अब्दुल वहाब सुख़न
ग़ज़ल
ख़ुलूस-ओ-प्यार आज भी वही है ख़ानदान में
बस इतना है 'सुख़न' कि जाँ-निसारियाँ नहीं रहीं
अब्दुल वहाब सुख़न
ग़ज़ल
ख़ैर-मक़्दम कह रही है शोख़ी-ए-मिज़्गाँ 'सुख़न'
उस की आँखें हैं या कोई मेज़बानी कश्तियाँ
अब्दुल वहाब सुख़न
ग़ज़ल
मेरे कश्कोल में कितनी हैं अधूरी ग़ज़लें
क्या करूँ फ़ुर्सत-ए-तकमील नहीं हो पाती