आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "tasadduq-e-jigar"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "tasadduq-e-jigar"
ग़ज़ल
हम दिल फ़िदा करें कि तसद्दुक़-ए-जिगर करें
जो भी कहें हुज़ूर वही उम्र भर करें
नादिर शाहजहाँ पुरी
समस्त
पुस्तकें के संबंधित परिणाम "tasadduq-e-jigar"
अन्य परिणाम "tasadduq-e-jigar"
ग़ज़ल
ग़ज़ल से ऐ 'जिगर' अंदाज़ा कर मेरी तबीअ'त का
ग़ज़ल में कैफ़ियत कुछ रूह की महसूस होती है
जिगर बरेलवी
ग़ज़ल
मर्ग-ए-'जिगर' पे क्यूँ तिरी आँखें हैं अश्क-रेज़
इक सानेहा सही मगर इतना अहम नहीं
जिगर मुरादाबादी
ग़ज़ल
सोज़-ए-ग़म से जब बहुत जलता है दिल अपना 'जिगर'
रूह की मंज़िल में कुछ कुछ रौशनी आती तो है