आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "thar-thar"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "thar-thar"
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "thar-thar"
अन्य परिणाम "thar-thar"
ग़ज़ल
काट गई कोहरे की चादर सर्द हवा की तेज़ी माप
उकड़ूँ बैठा इस वादी की तन्हाई में थर-थर काँप
अहसन शफ़ीक़
ग़ज़ल
फ़ुटपाथों पर रहने वाले थर-थर काँपते रहते हैं
दौलत वाले सोते हैं जब कम्बल और रज़ाई में
अहसन इमाम अहसन
ग़ज़ल
मिस्ल-ए-ख़ुर्शीद आसमाँ जलता है आह-ए-गर्म से
काँपती है ठंडी साँसों से मिरी थर-थर ज़मीं
ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर
नज़्म
दिसम्बर
सुब्ह-सलोनी गर्म चाय की प्याली ले कर दौड़ी
कैसा थर-थर काँप रहे हैं हाए दिसम्बर बाबा
अब्दुर्रहीम नश्तर
नज़्म
भूली बिसरी रात
पेड़ किनारे पर भीगी पर्वा से काँप रहे थे थर-थर
रह रह कर इक आध अन-देखा पंछी चीख़ उठता था जिन पर
तख़्त सिंह
नज़्म
जाड़े की बहारें
थर-थर का ज़ोर उखाड़ा हो बजती हो सब की बत्तीसी
हो शोर फफू हू-हू का और धूम हो सी-सी सी-सी की
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
आया मौसम जाड़े का
सर से पा तक जिस्म को ढाँपें आया मौसम जाड़े का
लेकिन फिर भी थर थर काँपें आया मौसम जाड़े का
