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नज़्म
ऐब्स्ट्रैक्ट आर्ट
नक़्श-ए-महबूब मुसव्विर ने सजा रक्खा था
मुझ से पूछो तो तिपाई पे घड़ा रक्खा था
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
शरारत का मज़ा
ये इक दिन का है ज़िक्र क़िस्सा हुआ क्या
तिपाई पे दादी ने ऐनक को रखा
मोहम्मद शफ़ीउद्दीन नय्यर
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रेख़्ता शब्दकोश
tipaa.ii
तिपाईتِپائی
तीन पायों वाली एक तरह की बैठने अथवा सामान आदि रखने की ऊँची चौकी, तीन पायों की चौकी, तीन पावों वाली छोटी ऊँची चौकी, तीन सतूनों या खंबों वाली तामीर, भवन की कैंची जो त्रिकोणीय होती है
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नज़्म
कहानी एक रात की
कौन है इस हजला-ए-तारीक में मेरे सिवा
जानता हूँ मशरिक़ी रुख़ पर तिपाई के क़रीब
दानिश फ़राज़ी
ग़ज़ल
आमिर अमीर
ग़ज़ल
असीर ऐ दोस्त तेरे आशिक़ ओ माशूक़ दोनों हैं
गिरफ़्तार आहनी ज़ंजीर का ये वो तिलाई का
हैदर अली आतिश
ग़ज़ल
तिलाई रंग पर क्यूँ कर न उन लोगों को ग़र्रा हो
ये ज़र वो चेहरा है ख़ातिर में नख़वत आ ही जाती है
इमदाद अली बहर
ग़ज़ल
है तसव्वुर रोज़-ओ-शब किस की तिलाई रंग का
चश्म-ए-नर्गिस की तरह ज़रदार आँखें हो गईं
ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर
ग़ज़ल
मू-ए-आतिश-दीद साँ बल खाए वो मू-ए-कमर
मैं जो लिक्खूँ गर्म मज़मूँ उस तिलाई डाब का