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नज़्म
आज बाज़ार में पा-ब-जौलाँ चलो
चश्म-ए-नम जान-ए-शोरीदा काफ़ी नहीं
तोहमत-ए-इश्क़-ए-पोशीदा काफ़ी नहीं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
है हम पे तोहमत-ए-मरज़-ए-इश्क़ 'अज़फ़री'
हम तुम हैं देखो थई से चँगे भले खड़े
मिर्ज़ा ज़हीरुद्दीन अज़फ़री
शेर
तोहमत-ए-जुर्म-ओ-ख़ता हिर्स-ओ-हवा ग़फ़लत-ए-दिल
हम ने बाज़ार से हस्ती के लिया क्या क्या कुछ
मिर्ज़ा मासिता बेग मुंतही
नज़्म
दो मशवरे
झुका के सर किसी फ़रमाँ-रवा की चौखट पर
ज़बान-ए-तोहमत-ओ-इल्ज़ाम बे-लगाम करो