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ग़ज़ल
इस को कहते हैं जहाँ में लोग सच्ची उल्फ़तें
तीर जब दिल से खिचेगा तो कमाँ हो जाएगा
आग़ा शाइर क़ज़लबाश
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रेख़्ता शब्दकोश
roz na.ii aafate.n honaa
रोज़ नई आफ़तें होना روز نَئی آفَتیں ہونا
हर रोज़ नई मुसीबत आना
roz na.ii aafate.n aanaa
रोज़ नई आफ़तें आना روز نَئی آفَتیں آنا
हर रोज़ नई मुसीबत आना
roz na.ii aafate.n pa.Dnaa
रोज़ नई आफ़तें पड़ना روز نَئی آفَتیں پَڑنا
हर रोज़ नई मुसीबत आना
aafate.n TuuT-TuuT kar aanaa
आफ़तें टूट-टूट कर आना آفتیں ٹوٹ ٹوٹ کر آنا
मुसीबत पर मुसीबत आना, बहुत सी विपत्तियाँ आना
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ग़ज़ल
उल्फ़तें सब को मयस्सर नहीं होतीं प्यारे
तिश्ना लम्हों की मुलाक़ात से उकताना मत
एम कोठियावी राही
ग़ज़ल
शम्सा नज्म
ग़ज़ल
पल भर में उल्फ़तें हैं तो पल भर में नफ़रतें
कैसे निभाएँ हुस्न की बाज़ीगरी से हम
डॉ. मोहम्मद जमाल
ग़ज़ल
वो जफ़ा के ख़ूगर हैं हम वफ़ा के पर्वर्दा
उल्फ़तें भी पाते हैं बरहमी के पर्दे में
मुन्ने ख़ाँ आज़िम
ग़ज़ल
घर के हर इक मक़ाम पर सहमी खड़ी थीं उल्फ़तें
कमरों से उस की याद के जाले अलग नहीं किए
नाहीद अज़्मी
ग़ज़ल
मेरे नग़्मों में ख़ुदाया एक ऐसा दर्द भर
सुनने वालों के दिलों में जाग उट्ठें उल्फ़तें
रघुबीर मल्होत्रा शाकिर
नज़्म
रक़ीब से!
जिस की उल्फ़त में भुला रक्खी थी दुनिया हम ने
दहर को दहर का अफ़्साना बना रक्खा था
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
करते हैं जिस पे ता'न कोई जुर्म तो नहीं
शौक़-ए-फ़ुज़ूल ओ उल्फ़त-ए-नाकाम ही तो है




