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नज़्म
एक नौ-जवान के नाम
न हो नौमीद नौमीदी ज़वाल-ए-इल्म-ओ-इरफ़ाँ है
उमीद-ए-मर्द-ए-मोमिन है ख़ुदा के राज़-दानों में
अल्लामा इक़बाल
शेर
एहतिशामुल हक़ सिद्दीक़ी
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ग़ज़ल
दिल-ए-मर्द-ए-मुसलमाँ में किसी बुत का क़दम आया
मिरी दुनिया में तुम आए कि पत्थर का सनम आया
रियाज़त अली शाइक
नज़्म
'गाँधी-जी' की याद में!
वही है शोर-ए-हाए-ओ-हू, वही हुजूम-ए-मर्द-ओ-ज़न
मगर वो हुस्न-ए-ज़िंदगी, मगर वो जन्नत-ए-वतन
जिगर मुरादाबादी
नज़्म
शा'इर-ए-मशरिक़ अल्लामा-'इक़बाल' के मज़ार पर
उठ ऐ मर्द-ए-मुजाहिद क़ौम पर है बे-हिसी छाई
नहूसत हुक्मराँ है बेबसी लेती है अंगड़ाई
रज़ी बदायुनी
ग़ज़ल
एहतिशामुल हक़ सिद्दीक़ी
नज़्म
'अल्लामा इक़बाल
मर्द-ए-मोमिन पर ख़ुदी का राज़ वा होता गया
हिन्द में रौशन सितारे आसमाँ बोता गया
शाहीन भट्टी
ग़ज़ल
दौलत-ए-फ़िक्र-ओ-'अमल को हाथ से जाने न दे
मर्द-ए-मोमिन याद रख दुनिया तिरी मंज़िल नहीं
नासिर अमरोहवी
ग़ज़ल
ज़माने की तरक़्क़ी तिश्ना-ए-तकमील है या रब
अभी इक मर्द-ए-मोमिन की कमी मालूम होती है




