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नज़्म
एक नौ-जवान के नाम
न हो नौमीद नौमीदी ज़वाल-ए-इल्म-ओ-इरफ़ाँ है
उमीद-ए-मर्द-ए-मोमिन है ख़ुदा के राज़-दानों में
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
नवा-ए-‘इश्क़
हयात-ए-मर्द-ए-मोमिन जावेदाना
ज़माना कुछ नहीं क्या है ज़माना
अफ़सर सीमाबी अहमद नगरी
शेर
एहतिशामुल हक़ सिद्दीक़ी
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ग़ज़ल
दिल-ए-मर्द-ए-मुसलमाँ में किसी बुत का क़दम आया
मिरी दुनिया में तुम आए कि पत्थर का सनम आया
रियाज़त अली शाइक
नज़्म
'गाँधी-जी' की याद में!
वही है शोर-ए-हाए-ओ-हू, वही हुजूम-ए-मर्द-ओ-ज़न
मगर वो हुस्न-ए-ज़िंदगी, मगर वो जन्नत-ए-वतन
जिगर मुरादाबादी
नज़्म
शा'इर-ए-मशरिक़ अल्लामा-'इक़बाल' के मज़ार पर
उठ ऐ मर्द-ए-मुजाहिद क़ौम पर है बे-हिसी छाई
नहूसत हुक्मराँ है बेबसी लेती है अंगड़ाई




