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ग़ज़ल
वो जफ़ा-दोस्त हूँ मिलती नहीं राहत मुझ को
वक़्फ़-ए-तेग़-ए-निगह-ओ-तीर-ए-नज़र होने तक
नज़ीर हुसैन सिद्दीक़ी
ग़ज़ल
दिल सरापा वक़्फ़-ए-सौदा-ए-निगाह-ए-तेज़ है
ये ज़मीं मिस्ल-ए-नीस्ताँ सख़्त नावक-ख़ेज़ है
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
देखा है जिन्हें वक़्फ़-ए-आदाब-ए-ग़म-ए-जानाँ
उन से ग़म-ए-जानाँ का इज़हार नहीं होता
शाइर फ़तेहपुरी
ग़ज़ल
गर्दिश-ए-वक़्त ने जब से मिरा घर देखा है
ज़ीस्त को वक़्फ़-ए-ग़म-ए-शाम-ओ-सहर देखा है