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हास्य
चीज़ क्या है सग-ए-कॉलेज कि मैं ख़रगोश रहूँ
क्यूँ ज़याँ-कार बन्नूँ सूद-फ़रामोश रहूँ
कर्नल मोहम्मद ख़ान
शेर
ज़बाँ कर के मुक़फ़्फ़ल तुम सदाएँ चाहते हो
सज़ा देते हो पहले फिर दुआएँ चाहते हो
अमीता परसुराम मीता
ग़ज़ल
ज़बाँ कर के मुक़फ़्फ़ल तुम सदाएँ चाहते हो
सज़ा देते हो पहले फिर दु'आएँ चाहते हो
अमीता परसुराम मीता
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नज़्म
शिकवा
क्यूँ ज़ियाँ-कार बनूँ सूद-फ़रामोश रहूँ
फ़िक्र-ए-फ़र्दा न करूँ महव-ए-ग़म-ए-दोश रहूँ
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
मोहब्बत में ज़ियाँ-कारी मुराद-ए-दिल न बन जाए
ये ला-हासिल ही उम्र-ए-इश्क़ का हासिल न बन जाए
ताजवर नजीबाबादी
ग़ज़ल
कैसे रुक सकता था जो कार-ए-ज़ियाँ होने को था
या'नी सब कुछ तय-शुदा था जो यहाँ होने को था
अब्दुल मन्नान समदी
ग़ज़ल
अब के बारिश में तो ये कार-ए-ज़ियाँ होना ही था
अपनी कच्ची बस्तियों को बे-निशाँ होना ही था
मोहसिन नक़वी
शेर
अब के बारिश में तो ये कार-ए-ज़ियाँ होना ही था
अपनी कच्ची बस्तियों को बे-निशाँ होना ही था



