aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "aks-e-shabaab"
असीर-ए-पंजा-ए-अहद-ए-शबाब कर के मुझेकहाँ गया मिरा बचपन ख़राब कर के मुझे
अक्स-ए-ज़ुल्फ़-ए-रवाँ नहीं जातादिल से ग़म का धुआँ नहीं जाता
अक्स-ए-ख़याल-ए-यार सँवारा करेंगे हमशीशे में आइने को उतारा करेंगे हम
सुबू में अक्स-ए-रुख़-ए-माहताब देखते हैंशराब पीते नहीं हम शराब देखते हैं
अक्स-ए-याद-ए-यार को धुँदला किया हैमैं ने ख़ुद को जान कर तन्हा किया है
दिल में इक इज़्तिराब बाक़ी हैये निशान-ए-शबाब बाक़ी है
नौ-जवानों को देख कर 'हातिम'याद अहद-ए-शबाब आवे है
कुछ न पूछो 'फ़िराक़' अहद-ए-शबाबरात है नींद है कहानी है
उस के अहद-ए-शबाब में जीनाजीने वालो तुम्हें हुआ क्या है
सँभाला होश तो मरने लगे हसीनों परहमें तो मौत ही आई शबाब के बदले
माना कि रंग रंग तिरा पैरहन भी हैपर इस में कुछ करिश्मा-ए-अक्स-ए-बदन भी है
ये शबाब-ए-हुस्न ये हुस्न-ए-शबाबहश्र तक उन पर यही आलम रहे
अभी गुनाह का मौसम है आ शबाब में आनशा उतरने से पहले मिरी शराब में आ
तेरा ही रक़्स सिलसिला-ए-अक्स-ए-ख़्वाब हैइस अश्क-ए-नीम-शब से शब-ए-माहताब तक
अजीब हाल था अहद-ए-शबाब में दिल कामुझे गुनाह भी कार-ए-सवाब लगता था
सितारा आँख में दिल में गुलाब क्या रखनाकि ढलती उम्र में रंग-ए-शबाब क्या रखना
तू भी जैसे बदल सा जाता हैअक्स-ए-दीवार के बदलते ही
इब्तिदा-ए-इश्क़ है लुत्फ़-ए-शबाब आने को हैसब्र रुख़्सत हो रहा है इज़्तिराब आने को है
वहशत में बसर होते हैं अय्याम-ए-शबाब आहये शाम-ए-जवानी है कि साया है हिरन का
झील में चाँदनी का अक्स-ए-जमीलया तिरी याद दिल से गुज़री है
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