aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "bazm-e-jaam-e-jam"
ये मय-ख़ाना है बज़्म-ए-जम नहीं हैयहाँ कोई किसी से कम नहीं है
हर इक रिंद के हाथ में जाम-ए-जम होकुछ इस शान का मै-कदा चाहता हूँ
शुक्रिया ऐ गर्दिश-ए-जाम-ए-शराबमैं भरी महफ़िल में तन्हा हो गया
कल जो ज़िक्र-ए-जाम-ओ-मीना आ गयामेरी तौबा को पसीना आ गया
सरसों जो फूली दीदा-ए-जाम-ए-शराब मेंबिंत-उल-अनब से करने लगा शोख़ियाँ बसंत
तर्क-ए-जाम-ओ-सुबू न कर पाएइस लिए हम वज़ू न कर पाए
उस वक़्त मुझ को दावत-ए-जाम-ओ-सुबू मिलीजिस वक़्त मैं गुनाह के क़ाबिल नहीं रहा
शौक़-ए-शराब ख़्वाहिश-ए-जाम-ओ-सुबू नहींहै सब हराम जब से कि पहलू में तू नहीं
गर्दिश-ए-मीना-ओ-जाम देखिए कब तक रहेहम पे तक़ाज़ा-ए-हराम देखिए कब तक रहे
ये तिरी मस्त-निगाही ये फ़रोग़-ए-मय-ओ-जामआज साक़ी तिरे रिंदों से अदब मुश्किल है
क्यूँ जाम-ए-शराब-ए-नाब माँगूँसाक़ी की नज़र में क्या नहीं है
चालीस जाम पी के दिया एक जाम-ए-मयसाक़ी ने ख़ूब राह निकाली ज़कात की
बादा-ओ-जाम के रहे ही नहींहम किसी काम के रहे ही नहीं
मुसल्ला रखते हैं सहबा-ओ-जाम रखते हैंफ़क़ीर सब के लिए इंतिज़ाम रखते हैं
हाथ फिर बढ़ रहा है सू-ए-जामज़िंदगी की उदासियों को सलाम
न पैमाने खनकते हैं न दौर-ए-जाम चलता हैनई दुनिया के रिंदों में ख़ुदा का नाम चलता है
दे मुझ को भी इस दौर में साक़ी सिपर-ए-जामहर मौज-ए-हवा खींचे है शमशीर हवा पर
मुझ तक कब उन की बज़्म में आता था दौर-ए-जामसाक़ी ने कुछ मिला न दिया हो शराब में
मिरी शाएरी में न रक़्स-ए-जाम न मय की रंग-फ़िशानियाँवही दुख-भरों की हिकायतें वही दिल-जलों की कहानियाँ
मुँह में वाइज़ के भी भर आता है पानी अक्सरजब कभी तज़्किरा-ए-जाम-ए-शराब आता है
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