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शेर
काम आख़िर जज़्बा-ए-बे-इख़्तियार आ ही गया
दिल कुछ इस सूरत से तड़पा उन को प्यार आ ही गया
जिगर मुरादाबादी
शेर
ख़ुदाया जज़्बा-ए-दिल की मगर तासीर उल्टी है
कि जितना खींचता हूँ और खिंचता जाए है मुझ से
मिर्ज़ा ग़ालिब
शेर
शौक़-ए-मंज़िल हम-सफ़र है जज़्बा-ए-दिल राहबर
मुझ पे ख़ुद भी खुल नहीं पाता किधर जाता हूँ मैं