aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "kurede"
जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगाकुरेदते हो जो अब राख जुस्तुजू क्या है
अगरचे फूल ये अपने लिए ख़रीदे हैंकोई जो पूछे तो कह दूँगा उस ने भेजे हैं
राख को भी कुरेद कर देखोअभी जलता हो कोई पल शायद
दर-ओ-दीवार पे शक्लें सी बनाने आईफिर ये बारिश मिरी तंहाई चुराने आई
आइने से नज़र चुराते हैंजब से अपना जवाब देखा है
तुम नज़र क्यूँ चुराए जाते होजब तुम्हें हम सलाम करते हैं
कुरेदता है बहुत राख मेरे माज़ी कीमैं चूक जाऊँ तो वो उँगलियाँ जला लेगा
फ़रेब-ख़ुर्दा है इतना कि मेरे दिल को अभीतुम आ चुके हो मगर इंतिज़ार बाक़ी है
मोहल्ले वाले मेरे कार-ए-बे-मसरफ़ पे हँसते हैंमैं बच्चों के लिए गलियों में ग़ुब्बारे बनाता हूँ
अभी तो कहा ही नहीं मैं ने कुछअभी तुम जो आँखें चुराने लगे
ऋषी के फ़ाक़ों से टूटा न बरहमन का तिलिस्मअसा न हो तो कलीमी है कार-ए-बे-बुनियाद
ये ख़ुद-फ़रेबी-ए-एहसास-ए-आरज़ू तो नहींतिरी तलाश कहीं अपनी जुस्तुजू तो नहीं
हम लकीरें कुरेद कर देखेंरंग लाएगा क्या ये साल नया
नींद का उस को नशा हम को जगाने की हवसख़्वाब में आते हुए नींद चुराते हुए हम
क़ाएदे बाज़ार के इस बार उल्टे हो गएआप तो आए नहीं पर फूल महँगे हो गए
है दिल में करूँ ज़िक्र-ए-ख़ुदा बुत को बिठा करसज्दा हो किसी का तो इबादत हो किसी की
बे-ख़ुद-ए-शौक़ हूँ आता है ख़ुदा याद मुझेरास्ता भूल के बैठा हूँ सनम-ख़ाने का
क़सम निबाह की खाई थी उम्र भर के लिएअभी से आँख चुराते हो इक नज़र के लिए
सख़्त मुश्किल है शेवा-ए-तस्लीमहम भी आख़िर को जी चुराने लगे
कैसे उस को दिल की हालत समझाऊँबात करूँ तो आँख चुराने लगता है
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