aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "morid"
कोई और भी मोरिद-ए-लुत्फ़ हुआ मिली अहल-ए-हवस को हवस की सज़ातिरे शहर में थे हमीं अहल-ए-वफ़ा मिली एक हमीं को जला-वतनी
चंद यादों के दिए थोड़ी तमन्ना कुछ ख़्वाबज़िंदगी तुझ से ज़ियादा नहीं माँगा हम ने
उस बार उजालों ने मुझे घेर लिया थाइस बार मिरी रात मिरे साथ चली है
मुरीद-ए-सादा तो रो रो के हो गया ताइबख़ुदा करे कि मिले शैख़ को भी ये तौफ़ीक़
ऐ अक़्ल नहीं आएँगे बातों में तिरी हमनादान थे नादान हैं नादान रहेंगे
मुझ को पाने की तमन्ना में वो ग़र्क़ाब हुआमैं ने साहिल की तमन्ना में उसे खोया है
जो बिछड़ गया वो मिला नहीं ये सवाल थाजो मिला नहीं वो बिछड़ गया ये कमाल है
ये हिजरतों के तमाशे, ये क़र्ज़ रिश्तों केमैं ख़ुद को जोड़ते रहने में टूट जाता हूँ
वो चाहते हैं कि हर बात मान ली जाएऔर एक मैं हूँ कि हर बात काट देता हूँ
इतना आसाँ नहीं लफ़्ज़ों को ग़ज़ल कर लेनाशोर को शेर बनाने में जिगर लगता है
लम्हे लम्हे से बनी है ये ज़माने की किताबनुक़्ता नुक़्ता यहाँ सदियों का सफ़र लगता है
हम यही समझे थे इक दिल ही तो है अपने लिएहम कहाँ समझे थे इतना सर-फिरा हो जाएगा
हादसे नहीं हुए कि तज्रबा नहीं हुआमुख़्तसर सी ज़िंदगी में क्या से क्या नहीं हुआ
उस को भी किसी तरह भरोसा नहीं थामैं ने भी किसी तौर सफ़ाई नहीं दी
ख़ुद को बर्बाद कर के देखना थाख़ुद को बर्बाद कर के देख लिया
ज़िंदगी हम तिरे कूचे में चले आए तो हैंतेरे कूचे की हवा हम से ख़फ़ा लगती है
ज़िंदगी आज ज़रा हँस के गले लग मुझ सेतेरी आँखों में नदामत नहीं देखी जाती
इसी जवाब के रस्ते सवाल आते हैंइसी सवाल में सारा जवाब ठहरा है
अब इस से पहले कि रुस्वाई अपने घर आतीतुम्हारे शहर से हम बा-अदब निकल आए
ख़्वाब में तोड़ता रहता हूँ अना की ज़ंजीरआँख खुलती है तो दीवार निकल आती है
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