आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "par-fashaan-e-sokhtan"
शेर के संबंधित परिणाम "par-fashaan-e-sokhtan"
शेर
है दसहरे में भी यूँ गर फ़रहत-ओ-ज़ीनत 'नज़ीर'
पर दिवाली भी अजब पाकीज़ा-तर त्यौहार है
नज़ीर अकबराबादी
शेर
बे-तकल्लुफ़ आ गया वो मह दम-ए-फ़िक्र-ए-सुख़न
रह गया पास-ए-अदब से क़ाफ़िया आदाब का
मुनीर शिकोहाबादी
शेर
'क़लक़' ग़ज़लें पढ़ेंगे जा-ए-कुरआँ सब पस-ए-मुर्दन
हमारी क़ब्र पर जब मजमा-ए-अहल-ए-सुख़न होगा
असद अली ख़ान क़लक़
शेर
फ़रहाद ओ क़ैस ओ वामिक़ पहुँचे ब-मंज़िल-ए-इश्क़
ढूँडा है जिस ने जिस को आख़िर वो पा चुका है
मेजर जूलियन फेलिज़ तालिब
शेर
इन दिनों गरचे दकन में है बड़ी क़द्र-ए-सुख़न
कौन जाए 'ज़ौक़' पर दिल्ली की गलियाँ छोड़ कर
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
शेर
ऐ 'मुसहफ़ी' तू और कहाँ शेर का दावा
फबता है ये अंदाज़-ए-सुख़न 'मीर' के मुँह पर
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
शेर
चराग़ शर्मा
शेर
हमीं हैं मौजिब-ए-बाब-ए-फ़साहत हज़रत-ए-'शाइर'
ज़माना सीखता है हम से हम वो दिल्ली वाले हैं