aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "pulanda"
उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआअब क्या कहें ये क़िस्सा पुराना बहुत हुआ
मस्जिद तो बना दी शब भर में ईमाँ की हरारत वालों नेमन अपना पुराना पापी है बरसों में नमाज़ी बन न सका
नए किरदार आते जा रहे हैंमगर नाटक पुराना चल रहा है
तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता हैतेरे आगे चाँद पुराना लगता है
रंग ख़ुश्बू और मौसम का बहाना हो गयाअपनी ही तस्वीर में चेहरा पुराना हो गया
ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने मेंएक पुराना ख़त खोला अनजाने में
जवानी क्या हुई इक रात की कहानी हुईबदन पुराना हुआ रूह भी पुरानी हुई
वही फ़िराक़ की बातें वही हिकायत-ए-वस्लनई किताब का एक इक वरक़ पुराना था
वही चराग़ बुझा जिस की लौ क़यामत थीउसी पे ज़र्ब पड़ी जो शजर पुराना था
ये लम्हा लम्हा तकल्लुफ़ के टूटते रिश्तेन इतने पास मिरे आ कि तू पुराना लगे
कभी कभी तो किसी अजनबी के मिलने परबहुत पुराना कोई सिलसिला निकलता है
चेहरे से झाड़ पिछले बरस की कुदूरतेंदीवार से पुराना कैलन्डर उतार दे
आख़िर इक रोज़ तो पैवंद-ए-ज़मीं होना हैजामा-ए-ज़ीस्त नया और पुराना कैसा
अचानक हड़बड़ा कर नींद से मैं जाग उट्ठा हूँपुराना वाक़िआ है जिस पे हैरत अब हुई है
कोई पुराना ख़त कुछ भूली-बिसरी यादज़ख़्मों पर वो लम्हे मरहम होते हैं
है ज़ेब-ए-गुलू कब से मिरे दार का फंदामुजरिम हूँ अगर मैं तो सज़ा क्यूँ नहीं देते
नया चार दिन में पुराना हुआयही सब हुआ तो नया क्या हुआ
ठहरना भी मिरा जाना शुमार होने लगापड़े पड़े मैं पुराना शुमार होने लगा
जब पुराना लहजा खो देता है अपनी ताज़गीइक नई तर्ज़-ए-नवा ईजाद कर लेते हैं हम
पुराना ज़हर नए नाम से मिला है मुझेवो आस्तीन नहीं केंचुली बदल रहा था
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