aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "samt"
इक तुझ को देखने के लिए बज़्म में मुझेऔरों की सम्त मस्लहतन देखना पड़ा
नज़र में दूर तलक रहगुज़र ज़रूरी हैकिसी भी सम्त हो लेकिन सफ़र ज़रूरी है
जिस सम्त भी देखूँ नज़र आता है कि तुम होऐ जान-ए-जहाँ ये कोई तुम सा है कि तुम हो
ये अलग बात कि मैं नूह नहीं था लेकिनमैं ने कश्ती को ग़लत सम्त में बहने न दिया
हम जुदा हो गए आग़ाज़-ए-सफ़र से पहलेजाने किस सम्त हमें राह-ए-वफ़ा ले जाती
जिस सम्त की हवा है उसी सम्त चल पड़ेंजब कुछ न हो सका तो यही फ़ैसला किया
हम अपनी धरती से अपनी हर सम्त ख़ुद तलाशेंहमारी ख़ातिर कोई सितारा नहीं चलेगा
मंज़िल की सम्त कब से सफ़र कर रहे हैं हमलेकिन जो फ़ासले थे वो अब तक न कम हुए
फूलों की ताज़गी ही नहीं देखने की चीज़काँटों की सम्त भी तो निगाहें उठा के देख
तिरा दीदार हो आँखें किसी भी सम्त देखेंसो हर चेहरे में अब तेरी शबाहत चाहिए है
पलट के आ गई ख़ेमे की सम्त प्यास मिरीफटे हुए थे सभी बादलों के मश्कीज़े
इतनी तो दीद-ए-इश्क़ की तासीर देखिएजिस सम्त देखिए तिरी तस्वीर देखिए
दिल अजब शहर कि जिस पर भी खुला दर इस कावो मुसाफ़िर इसे हर सम्त से बर्बाद करे
दिल में रख ज़ख़्म-ए-नवा राह में काम आएगादश्त-ए-बे-सम्त में इक हू का मक़ाम आएगा
मैं सफ़र में हूँ मगर सम्त-ए-सफ़र कोई नहींक्या मैं ख़ुद अपना ही नक़्श-ए-कफ़-ए-पा हूँ क्या हूँ
अपनी पर्वाज़ को मैं सम्त भी ख़ुद ही दूँगातू मुझे अपनी रिवायात का पाबंद न कर
अपने ही आप से इस तरह हुए हैं रुख़्सतसाँस को छोड़ दिया जिस सम्त भी जाना चाहे
कुएँ की सम्त बुला ले न कोई ख़्वाब मुझेमैं अपने बाप का सब से हसीन बेटा हूँ
हर सम्त फ़लक-बोस पहाड़ों की क़तारें'ख़ुसरव' है न 'शीरीं' है न तेशा है न फ़रहाद
वो बहुत दूर है मगर मिरे पासएक ही सम्त का कराया है
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