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ग़ज़ल
संसार से भागे फिरते हो भगवान को तुम क्या पाओगे
इस लोक को भी अपना न सके उस लोक में भी पछताओगे
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
इश्क़ तो मुश्किल है ऐ दिल कौन कहता सहल है
लेक नादानी से अपनी तू ने समझा सहल है
बहादुर शाह ज़फ़र
ग़ज़ल
है तो गर्दिश चर्ख़ की भी फ़ित्ना-अंगेज़ी में ताक़
तेरी चश्म-ए-फ़ित्ना-ज़ा की लेक गर्दिश और है