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ग़ज़ल
ज़मीं बदली फ़लक बदला मज़ाक़-ए-ज़िंदगी बदला
तमद्दुन के क़दीम अक़दार बदले आदमी बदला
फ़िराक़ गोरखपुरी
ग़ज़ल
खिलौना तो निहायत शोख़ ओ रंगीं है तमद्दुन का
मुआर्रिफ़ मैं भी हूँ लेकिन खिलौना फिर खिलौना है
जोश मलीहाबादी
ग़ज़ल
वही हैं क़त्ल-ओ-ग़ारत और वही कोहराम है साक़ी
तमद्दुन और मज़हब की ये ख़ूनी शाम है साक़ी
अजय सहाब
ग़ज़ल
इस इर्तिक़ा-ए-तमद्दुन को क्या कहूँ 'मुल्ला'
हैं शमएँ शोख़-तर आवारा-तर हैं परवाने
आनंद नारायण मुल्ला
ग़ज़ल
आँखें बदलीं फिर दिल बदले तहज़ीब-ओ-तमद्दुन भी बदले
अंजाम कहाँ होगा उस के इम्कान बदलते रहते हैं
नजमा जाफ़री
ग़ज़ल
अगर ये कशमकश बाक़ी रही जहल ओ तमद्दुन की
ज़माना छीन लेगा दौलत-ए-इल्म-ओ-यक़ीं मुझ से
अली जवाद ज़ैदी
ग़ज़ल
रामपुर ऐ मिरे तहज़ीब-ओ-तमद्दुन के दयार
हो मुबारक तुझे उर्दू का दबिस्ताँ होना