आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "قیدی"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "قیدی"
ग़ज़ल
अगर सोने के पिंजड़े में भी रहता है तो क़ैदी है
परिंदा तो वही होता है जो आज़ाद रहता है
मुनव्वर राना
ग़ज़ल
क़ैदी हूँ मैं तिरा ब-ख़ुदा-वंदी-ए-ख़ुदा
और उस अज़ीज़-ए-मिस्र के ज़िंदान की क़सम
इंशा अल्लाह ख़ान इंशा
ग़ज़ल
ये भी क़ैदी हो गया आख़िर कमंद-ए-ज़ुल्फ़ का
ले असीरों में तिरे 'आज़ाद' शामिल हो गया
अबुल कलाम आज़ाद
ग़ज़ल
मैं जिस ख़ौफ़ में था उस में कुछ और भी क़ैदी थे
मैं जिस ख़्वाब में था उस में दरवाज़ा कोई न था
साक़ी फ़ारुक़ी
ग़ज़ल
लीजिए क्या दामन की ख़बर और दस्त-ए-जुनूँ को क्या कहिए
अपने ही हाथ से दिल का दामन मुद्दत गुज़री छूट गया
फ़ानी बदायुनी
ग़ज़ल
नींदें भी नज़र बंद हैं ता'बीर भी क़ैदी
ज़िंदाँ में कोई ख़्वाब सुनाना ही नहीं था
ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
ग़ज़ल
क़ैदी-ए-ग़म तुर्बतों में और उन को ये ख़याल
काटने में इक शब-ए-फ़ुर्क़त के मर जाएँगे क्या