आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "معتدل"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "معتدل"
ग़ज़ल
है फ़क़त मुर्ग़-ए-गज़ल-ख़्वाँ कि जिसे फ़िक्र नहीं
मो'तदिल गर्मी-ए-गुफ़्तार करूँ या न करूँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
मिरी जवानी के गर्म लम्हों पे डाल दे गेसुओं का साया
ये दोपहर कुछ तो मो'तदिल हो तमाम माहौल जल रहा है
अब्दुल हमीद अदम
ग़ज़ल
मैं बे-सलीक़ा ख़यालों का मो'तदिल मिस्रा
सुख़नवरी के जो हैं ढब मज़ाक़ करते हैं