आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "पेशाब"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "पेशाब"
ग़ज़ल
मुन्कशिफ़ होती हक़ीक़त मर्ग गर रोज़-ए-अलस्त
हरगिज़ ऐ दहर अज़ अदम करते नहीं पेशाब हम
क़ासिम अली ख़ान अफ़रीदी
ग़ज़ल
ऐ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा हाँ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
आज एक सितमगर को हँस हँस के रुलाना है