aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "बे-पर"
बे-पर उड़ने लगे हैं लोगईश्वर तेरी माया है
परवाज़ियों की शरह नज़र तक न कर सकीलेकिन ख़याल-ए-ताइर-ए-बे-पर कहा गया
जब चली तेज़ हवा की तलवारकितने पंछी हुए बे-पर लिखना
मोहब्बत ने इसे परवाज़ दी हैहमारी शाइ'री बे-पर नही है
मैं हूँ और मेरी बे-पर-ओ-बालीदिल है और दिल की जुरअत-ए-परवाज़
अमृत-बूँद आसमान से टपका पानीगर्म तवे पर एक परिंदा-ए-बे-पर प्यास
अब की सय्याद ने तुर्फ़ा सितम ईजाद कियाबे-पर-ओ-बाल समझ कर हमें आज़ाद किया
लोग समझा किए मौसम ही नहीं उड़ने काउस की उज़्लत का सबब बे-पर-ओ-बाली निकला
पेच गेसू के ता-कमर निकलेइश्क़-ए-बे-पर के बाल-ओ-पर निकले
न उक्ताओ जो बे-पर की उड़ाएकि 'ज़ाहिद' यार है अपना पुराना
है धोका देना अपने आप को बसकिसी इंसान को बे-पर समझना
देख ले बे-पर-ओ-बाली पे भी परवाज़ मिरीइतना कह दे कि गुलिस्ताँ में बहार आई है
काम आती है परिंदों की असीरी के लिएहक़ में सय्याद के ये बे-पर-ओ-बाली हुई है
उन के कहने पे क्यों यक़ीं आएरोज़ बे-पर की जो उड़ाते हैं
कुछ फ़ज़ा की भी ज़रूरत है मुझेअपनी बे-पर की उड़ाने के लिए
जो ख़ुद शाहीं बने थे देखिए वोपरिंदे क़ैद में बे-पर खड़े हैं
अजब दस्तूर है अबरार इस दुनिया-ए-बे-पर काशिकस्ता-रंग पत्तों पर फ़िदा शबनम नहीं होती
क्या मेरी हक़ीक़त थी गुलिस्ताँ में न पूछोमैं था मगर इक ताइर-ए-बे-पर की तरह था
बे-पर-ए-पर्वाज़ उड़ना आप काझूट सीना तान कर तौबा ज़रूर
ये दुनिया आसमाँ में उड़ रही हैये लगती है मगर बे-पर नहीं है
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