आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "KHanjar-e-bedaad"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "KHanjar-e-bedaad"
ग़ज़ल
न अदा मुझ से हुआ उस सितम-ईजाद का हक़
मेरी गर्दन पे रहा ख़ंजर-ए-बेदाद का हक़
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
ग़ज़ल
देख कर शौक़-ए-शहादत बर-सर-ए-मक़्तल मिरा
क़ातिलों ने हाथ से घबरा के ख़ंजर रख दिए
शान-ए-हैदर बेबाक अमरोहवी
ग़ज़ल
देख लेना पस-ए-क़ातिल भी कोई होगा ज़रूर
सिर्फ़ क़ातिल ही चलाता नहीं ख़ंजर देखो
बद्र-ए-आलम ख़ाँ आज़मी
ग़ज़ल
दस्त-ए-क़ातिल में कोई तेग़ न ख़ंजर होता
मिरा साया जो मिरे क़द के बराबर होता
बद्र-ए-आलम ख़ाँ आज़मी
ग़ज़ल
है अपने क़त्ल की दिल-ए-मुज़्तर को इत्तिलाअ
गर्दन को इत्तिलाअ न ख़ंजर को इत्तिलाअ