aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "aa.nchal"
इस के साए में मिरे ख़्वाब दहक उट्ठेंगेमेरे चेहरे पे चमकता हुआ आँचल कर दो
दूर के चाँद को ढूँडो न किसी आँचल मेंये उजाला नहीं आँगन में समाने वाला
मुद्दतों ब'अद मयस्सर हुआ माँ का आँचलमुद्दतों ब'अद हमें नींद सुहानी आई
जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता हैउन का हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है
ख़ुदा के लिए छोड़ दो अब ये पर्दा कि हैं आज हम तुम नहीं ग़ैर कोईशब-ए-वस्ल भी है हिजाब इस क़दर क्यों ज़रा रुख़ से आँचल उठा कर तो देखो
ये हवा कैसे उड़ा ले गई आँचल मेरायूँ सताने की तो आदत मिरे घनश्याम की थी
ये अदा ये नज़ाकत भरा सिन मेरा दिल तुम पे क़ुर्बान लेकिनक्या सँभालोगे तुम मेरे दिल को जब ये आँचल सँभलता नहीं है
दामन-ए-शब को अगर चाक भी कर लीं तो कहाँनूर में डूबा हुआ सुब्ह का आँचल मिलना
बचपने का साथ है फिर एक से दोनों के दुखरात का और मेरा आँचल भीगता है साथ साथ
सुब्हों के मुक़द्दर को जगाते हुए मुखड़ेआँचल जो निगाहों में न लहराएँ तो सोएँ
होंटों में ले के रात के आँचल का इक सिराआँखों पे रख के चाँद के होंटों का मस जिए
आज की रात भी गुज़री है मिरी कल की तरहहाथ आए न सितारे तिरे आँचल की तरह
गुनगुनाते हुए आँचल की हवा दे मुझ कोउँगलियाँ फेर के बालों में सुला दे मुझ को
ज़िंदगी अपनी अँधेरों में बसर करता हैतेरे आँचल को सितारों से सजाने वाला
सलीस शुस्ता मुरस्सा' नफ़ीस नर्म रवाँदबा के दाँतों में आँचल ग़ज़ल उठाई गई
भीगी ज़ुल्फ़ें भीगा आँचल नींद थी आँखों मेंकुछ ऐसे हालात थे मेरे और दिसम्बर था
गोशे आँचल के तिरे सीने परहाए क्या चीज़ लिए बैठे हैं
कभी पलकों पे चमकती है जो अश्कों की लकीरसोचता हूँ तिरे आँचल का किनारा ही न हो
आँचल मिरे भर के फट रहे हैंफूल उस के लिए चुनूँ कहाँ तक
हम आप के क़दमों पर गिर जाएँगे ग़श खा करइस पर भी न हम अपने आँचल की हवा दें तो
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