आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "asp"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "asp"
ग़ज़ल
उड़ता है शौक़-ए-राहत-ए-मंज़िल से अस्प-ए-उम्र
महमेज़ कहते हैंगे किसे ताज़ियाना क्या
हैदर अली आतिश
ग़ज़ल
जो कुछ है हुस्न में हर मह-लक़ा को ऐश-ओ-तरब
वही है इश्क़ में हर मुब्तला को ऐश-ओ-तरब
नज़ीर अकबराबादी
ग़ज़ल
कर कुछ ऐसा कि तिरी ख़ाक में पर्वाज़ आए
अब कोई अस्प-ए-फ़लक-ए-सैर इसी तौसन से निकाल
ख़ुर्शीद रिज़वी
ग़ज़ल
तौक़-ए-ज़र्रीं अस्प-ए-ताज़ी के गले में है तो क्या
अस्प-ए-ताज़ी में भी अब औसाफ़-ए-ख़र पाते हैं हम