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ग़ज़ल
वो करेंगे ना-ख़ुदाई तो लगेगी पार कश्ती
है 'नसीर' वर्ना मुश्किल, तिरा पार यूँ उतरना
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
ग़ज़ल
फ़ना निज़ामी कानपुरी
ग़ज़ल
हर बात गवारा कर लोगे मिन्नत भी उतारा कर लोगे
ता'वीज़ें भी बंधवाअोगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा
सईद राही
ग़ज़ल
समुंदर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं
तिरी आँखों को पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं
वसी शाह
ग़ज़ल
मोहब्बत इक न इक दिन ये हुनर तुम को सिखा देगी
बग़ावत पर उतरना और ख़ुद-मुख़्तार हो जाना