आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "atraaf"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "atraaf"
ग़ज़ल
उस की ख़ुश-बू कहीं अतराफ़ में फैली हुई है
सुब्ह से रक़्स-कुनाँ बाद-ए-सबा है मुझ में
इरफ़ान सत्तार
ग़ज़ल
दिए जलते हैं, बुझते हैं, मिरे अतराफ़ में और मैं
बस इक साए के पीछे भागता रहता हूँ बारिश में
ख़ालिद मोईन
ग़ज़ल
इसी बाइ'स मैं अपना निस्फ़ रखता हूँ अँधेरे में
मिरे अतराफ़ भी सूरज कोई गर्दिश में रहता है
अरशद जमाल सारिम
ग़ज़ल
ये दो बाज़ू हैं सौ थोड़ी हैं खोलूँ और बता दूँ
मिरे अतराफ़ में किस किस का आना रह गया है
शाहीन अब्बास
ग़ज़ल
कोई झोंका तो लाती ऐ नसीम अतराफ़-ए-कनआँ तक
सवाद-ए-मिस्र में अम्बर-फ़िशानी अब भी होती है