आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "base"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "base"
ग़ज़ल
जावेद अख़्तर
ग़ज़ल
मिरे नगर की हसीं फ़ज़ाओ कहीं जो उन का निशान पाओ
तो पूछना ये कहाँ बसे वो कहाँ है उन का क़याम लिखना
हसन रिज़वी
ग़ज़ल
बाहर बाहर सन्नाटा है अंदर अंदर शोर बहुत
दिल की घनी बस्ती में यारो आन बसे हैं चोर बहुत
उमर अंसारी
ग़ज़ल
तू भी हरे दरीचे वाली आ जा बर-सर-ए-बाम है चाँद
हर कोई जग में ख़ुद सा ढूँडे तुझ बिन बसे आराम है चाँद
इब्न-ए-इंशा
ग़ज़ल
बसे हैं जल्वे कुछ ऐसे निगाह-ए-आशिक़ में
जिसे भी देखे कोई तुझ से मा-सिवा न लगे