aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "be-sabab"
यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करोवो ग़ज़ल की सच्ची किताब है उसे चुपके चुपके पढ़ा करो
बे-सबब मुस्कुरा रहा है चाँदकोई साज़िश छुपा रहा है चाँद
आज तो बे-सबब उदास है जीइश्क़ होता तो कोई बात भी थी
बे-सबब ही शोर सारा था कभीदर्द-ए-दिल भी दिल का चारा था कभी
बे-सबब भी रक़ीब होते हैंलोग कितने अजीब होते हैं
बे-सबब बार बार आती हैयाद बे-इख़्तियार आती है
सबब बनाए कभी बे-सबब बिछड़ जाएउसे ये हक़ है कि ढाए ग़ज़ब बिछड़ जाए
बे-सबब हँसने मुस्कुराने सेरंज छुप जाएगा ज़माने से
बे-सबब इश्क़ कब उदास रहावो तुम्हारा अदा-शनास रहा
मुसलसल इक मशक़्क़त बे-सबब हैमोहब्बत भी बहुत मेहनत-तलब है
बे-सबब जो भी मुस्कुराता हैदिल के ज़ख़्मों को वो छुपाता है
हादसे सब बे-सबब कैसे हुएबहते दरिया तिश्ना-लब कैसे हुए
बे-सबब कौन ख़ून रोता हैदर्द सा एक दिल में होता है
बे-सबब बात बढ़ाने की ज़रूरत क्या हैहम ख़फ़ा कब थे मनाने की ज़रूरत क्या है
बे-सबब लोग बदलते नहीं मस्कन अपनातुम ने जलते हुए देखा है नशेमन अपना
बे-सबब हम से जुदाई न करोमुझ से आशिक़ से बुराई न करो
कभी बे-सबब तुम रुला कर तो देखोमुझे मेरी जाँ आज़मा कर तो देखो
वही बे-सबब से निशाँ हर तरफ़वही नक़्श-ए-सद-राएगाँ हर तरफ़
बे-सबब ही इधर-उधर जातातुम नहीं होते तो बिखर जाता
बे-सबब चाक पर धरे थे हमबनते बनते भी क्या बने थे हम
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