aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "bhatak"
सहरा सहरा भटक रहा हैअपने इश्क़ में सच्चा चाँद
कहीं चाँद राहों में खो गया कहीं चाँदनी भी भटक गईमैं चराग़ वो भी बुझा हुआ मेरी रात कैसे चमक गई
अपनी तलाश अपनी नज़र अपना तजरबारस्ता हो चाहे साफ़ भटक जाना चाहिए
दिन में भटक रहे हैं जो मंज़िल की राह सेये लोग क्या करेंगे अगर रात हो गई
दिन में परियों की कोई कहानी न सुनजंगलों में मुसाफ़िर भटक जाएँगे
भटक रही थी जो कश्ती वो ग़र्क़-ए-आब हुईचढ़ा हुआ था जो दरिया उतर गया यारो
मैं राह से भटक गया तो क्या हुआचराग़ मेरे हाथ में तो था नहीं
ख़ुशबू से मेरा रब्त है जुगनू से मेरा कामकितना भटक गया हूँ मुझे मार दीजिए
मैं कह रहा हूँ कि ऐ दिल इधर-उधर न भटकगुज़र न जाए ज़माना उदास होने का
ज़मीं छुटी तो भटक जाओगे ख़लाओं मेंतुम उड़ते उड़ते कहीं आसमाँ न छू लेना
भटक रही है पुरानी दुलाइयाँ ओढ़ेहवेलियों में मिरे ख़ानदान की ख़ुशबू
हैं फ़ोन पे किस के साथ बातेंऔर ज़ेहन कहाँ भटक रहा है
पुकार ऐ जरस-ए-कारवान-ए-सुब्ह-ए-तरबभटक रहे हैं अँधेरों में तेरे सौदाई
नंगी सड़कों पर भटक कर देख जब मरती है रातरेंगता है हर तरफ़ वीराना तेरे शहर में
तुम भटक जाओ तो कुछ ज़ौक़-ए-सफ़र आ जाएगामुख़्तलिफ़ रस्तों पे चलने का हुनर आ जाएगा
किसी सहरा में बिछड़ जाएँगे सब यार मिरेकिसी जंगल में भटक जाए गा लश्कर मेरा
मुझे आ के दे सहारा ये क़दम न डगमगाएँकहीं मैं भटक न जाऊँ मुझे रास्ता दिखा जा
भटक रही है अँधेरे में ज़िंदगी की बरातकोई चराग़ सर-ए-रहगुज़र जलाता जा
भटक जाती हैं तुम से दूर चेहरों के तआक़ुब मेंजो तुम चाहो मिरी आँखों पे अपनी उँगलियाँ रख दो
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